साथी

Twit-Bit

Friday 27 August 2010

अश'आर चन्द यूँ भी

आज के हालात का मैं तब्सरा हूँ
ख़ुश-तबस्सुम-लब मगर अन्दर डरा हूँ

बस गए जो वो किसी शर्त छोड़ते ही नहीं
टूटा-फूटा सा पुराना मकान मेरा दिल!

इस राह पे चलना भी ख़ुद हासिले-सफ़र है
मंज़िल क़रीब है पर दुश्वार रहगुज़र है


आए हैं, मुँह फुलाए बैठे हैं
लगता है ख़ार खाए बैठे हैं
उधर लाल-आँखें, चढ़ी हैं भौंहें
हम इधर दिल बिछाए बैठे हैं

16 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

आपके दिल बिछाने से तो अच्छे अच्छे बिछ जायें।

नीरज गोस्वामी said...

क्या खूब कही...भाई वाह...
नीरज

Dr.Ajmal Khan said...

bahut khob,wah wah....

Virendra Singh Chauhan said...

Vah kya khoob likha hai..sir....chaa gaye....

Divya said...

Do not worry..She 'll come..

आशीष/ ਆਸ਼ੀਸ਼ / ASHISH said...

बाऊ जी, नमस्ते!
पहला अश'आर: व्हाट इज़ तब्सरा?
दूसरा: वाह! वाह! खुशनसीब हैं आप!!! पर खाली क्यूँ करवाना है? कहीं कोई नया किरायेदार तो नहीं........?!?!?!
तीसरा: खरामा-खरामा पहुँच ही जायेंगे!
चौथा: वक़्त-वक़्त की बात है! ठंडा पानी ऑफर कीजिये!
आशीष
--
बैचलर पोहा!!!

Mumukshh Ki Rachanain said...

आए हैं, मुँह फुलाए बैठे हैं
लगता है ख़ार खाए बैठे हैं
उधर लाल-आँखें, चढ़ी हैं भौंहें
हम इधर दिल बिछाए बैठे हैं
बहुत खूब.........सुन्दर प्रस्तुति

चंद्रमोहन गुप्त

इलाहाबादी अडडा said...

खूबसूरत अहसासों को सुन्‍दर शब्‍दों में पिराओया है, बहुत खूब

Amit K Sagar said...

क्या कहूं? बहुत उम्दा लिखा है, मजा आ गया पढ़कर.
जारी रहें.

shikha varshney said...

उधर लाल-आँखें, चढ़ी हैं भौंहें
हम इधर दिल बिछाए बैठे हैं
बहुत खूब :)

Sanuli said...

Bahot Khub... :)
Go thr my blog also...
http://www.niceshayari-poems.blogspot.com/

Sanuli said...

Bahot Khub... :)
Go thr my blog also...
http://www.niceshayari-poems.blogspot.com/

Dr.R.Ramkumar said...

इस राह पे चलना भी ख़ुद हासिले-सफ़र है
मंज़िल क़रीब है पर दुश्वार रहगुज़र है

बहुत सुन्दर पंक्तियां

Pushpendra Dwivedi said...
This comment has been removed by the author.
Pushpendra Dwivedi said...

bahut badhiyaa shayari umdaah waah maza aa gaya

http://www.pushpendradwivedi.com/

DIL-E-SHAYARI said...

Wow Very nice like it…